क्षारसूत्र चिकित्सा

क्षारसूत्र क्या है?

"भावितं रजनी चूर्णे स्नूही क्षीरं पुनः पुनः।"

Ksharshutra is a medicated thread, which was fistly used by acharya Sushrut (Father of Surgery) An ancient ERA of ayurveda for treating ano-rectal diseases

(आयुर्वेदिक द्वारा उपचार)

औषिधियों द्वारा : आयुर्वेद औषधियों के द्वारा 1st degree piles एवं फिसर रोग पूर्णतः ठीक हो जाते है। मगर इन रोगों की अवधि 6 माह से साल भर के मध्य होना चाहिए। Medicine के साथ-साथ पथ्य आहार-पालन आवश्यक होता है। यदि रोग पुराना हो जाता है तब यह Medicine के द्वारा ठीक तो हो जाता है मगर अपथ्य आहार विहार से पुनः हो जाता है। रोग के बार-बार हो जाने पर या अधिक पुराना हो जाने पर इनका उपचार क्षारसूत्र पद्धति के द्वारा किया जाता है- जिससे रोग की पूर्ण रूप से समाप्ति हो जाती है एवं दोबारा होने की संभावना ना के बराबर होती है।

एनो - रेक्टल रोग

एनो - रेक्टल रोग मल द्वार से संबंधित रोग होते है। जैसे पाइल्स (खूनी या वादी), फिसर, फिश्चुला, प्रोलेप्स आदि।

इन रोगो के कुछ सामान्य लक्षण होते है जैसेः-

  • ▶ मलत्याग के समय दर्द होना

  • ▶ जलन होना

  • ▶ मल द्वार से खून आना

  • ▶ खुजली होना

  • ▶ लगातार कब्ज रहना (मलत्याग के समय जोर लगाना)
  • ▶ मल द्वार के आस-पास कोई फुंसी होना जोकि बार-बार ठीक होकर पुनः हो जावे।
  • ▶ मल द्वार से कुछ बाहर आने का आभास होना उपर्युक्त सभी लक्षण गुदा रोग होने के संभावना को दर्शाते है।

क्षारसूत्र पद्धति क्या है?

क्षारसूत्र पद्धति प्राचीन आयुर्वेदीय शल्य चिकित्सा (Surgery है। इस पद्धति का प्रयोग सभी गुदा रोगों पर किया जाता है।

इस क्षारसूत्र पद्धति में मरीज को न तो बेहोश किया जाता है और न किसी भी प्रकार की चीर-फाड़ की जाती है। मरीज आधा - 1 घंटे के बाद घर जा सकता है।

पाइल्स, फिसर आदि रोग इस पद्धति से 3-4 दिनों में समूल रूप से ठीक हो जाते है एवं फिश्चुला को ठीक होने की अवधि रोग की अवस्था पर निर्भर करती है।

आयुर्वेद चिकित्सालय

डॉ. अंचलेश मिश्रा